दिनांक 8.4.2010 को महाराष्ट्र विधान सभा में जो कुछ हुआ किसी से छिपा नहीं है। राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के विधायक जितेन्द्र अवहार्ड ने सदन को बताया कि अभिनव भारत और सनातन प्रभात जैसे अतिवादी संगठन ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संध के वर्तमान सर्वसंघ चालक श्री मोहन भागवत की हत्या कारित करने का कार्यक्रम बना लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी खूफिया एजेन्सी आई0एस0आई0 की मदद से हिन्दुत्ववादी संगठन देश में अराजकता फैलाने के लिए प्रयासरत हैं और उन्होंने ही अजमेर की दरगाह में और समझौता एक्सप्रेस में बम धमाके किये थे। ए0टी0एस0 महाराष्ट्र के स्तम्भ रहे स्वर्गीय हेमन्त करकरे ने भी श्री मोहन भागवत को इस तथ्य की जानकारी देते हुए उन्हें आगाह किया था, कारण कि वह संगठन मानते हैं कि श्री मोहन भागवत जैसे लोग हिन्दुत्व के रास्ते से भटक गये हैं। यदि श्री मोहन भागवत की हत्या कर दी गई होती तो उसके नतीजे में आज यह देश जल रहा होता और आग बुझाने के सारे प्रयास निरर्थक सिद्ध होते। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जो अपने को हिन्दुत्व का ध्वजावाहक बताता है, जिसके इस दावे को लोग जाने-अनजाने स्वीकार भी करते हैं। यदि इस संगठन के सर्वसंघ चालक जिनकी अपनी प्रतिष्ठा है मार दिये गये होते तो अविश्वास का कोई कारण नहीं बनता कि उनकी हत्या किसी मुसलमान या मुस्लिम संगठन ने की। 1984 अभी लोग भूल नहीं पाये हैं जब देश की प्रधानमंत्री की हत्या कर पूरे देश में पूरे सिक्ख समाज को गुनहगार मानकर उन्हें जिन्दा जलाया गया, उनका घरबार और दुकाने लूटीं गईं, कुल मिलाकर जानी-माली नुकसान पहुंचाया गया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मानस पुत्र स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती उड़ीसा के जनजातियों के बीच में चकाबाद नामक स्थान पर आश्रम बनाकर निवास करते और गुरूकुल संस्कृत विद्यालय चलाते तथा मुख्य रूप से धर्मान्तरण का आरोप लगाकर इसाइयों में दहशत पैदा करने का काम करते थे। स्वामी जी की भी हत्या कैसे हुई यह ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन उनकी हत्या के बाद उत्पात मचाकर इसाइयों की जान-माल और धर्म स्थलों को किस तरह नुकसान पहुंचाया गया, यह घटना किसी से छिपी नहीं है और कन्धमाल की यह घटना आज भी मानवता के लिए काम करने वाले लोगों के रोंगटे खड़े कर देती है।
क्या-क्या गिनाया जाए, नानदेड़ में हिन्दुत्ववादी संगठन के बाद से मुस्लिम पहचान बताने वाले कुर्ते-पायज़ामें, टोपी-दाढ़ी बरामद किया गया। हैदराबाद की मक्का-मस्जिद पर ब्लास्ट करके बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को फंसाया गया। उत्तर प्रदेश की कचहरियों में ब्लास्ट कराकर गुनहगारों को न पकड़कर बेगुनाहों को पकड़ा गया। बाटला हाउस में हत्या करके आजमगढ़ के बेगुनाहों को फंसाया गया, इस तरह की घटनाओं की गिनती बहुत है। इन्हें गिनाने के लिए काफी समय लगेगा, लेकिन कुछ घटनायें ऐसी भी हैं जिसमें गुनहगारों का चेहरा सामने आया। कानपुर में बजरंग दल के दो लोग अपने ही विस्फोटक से जान गवां बैठे और फाइल बंद कर दी गई। हेमन्त करकरे जैसा जांबाज़ ही था जिसनें मालेगांव ब्लास्ट के असल गुनहगारों को पकड़ा और नतीजा आपके सामने है। गोवा में भी असली चेहरे सामने आये लेकिन पूणे में विवेचना जारी है, जबकि वहां भी सबद हाउस को निशाना बनाया जाना बताया गया है।
दम है, महाराष्ट्र विधान सभा में जितेन्द्र अवहार्ड द्वारा खुलासा किये गये तथ्यों में अगर कहीं अभिनव भारत और सनातन प्रभात अपने लक्ष्य में सफल हो जाते तो सचमुच हिन्दु-मुसलमान के बीच का तांडव रोके नहीं रूकता और हमारी भारत माता अपने सपूतों के आपसी उन्माद के नतीजों में उनके बहते खून पर विलाप कर रही होती। आज हमें सतर्क रहना है कि किये जा रहे इस तरह के षड़यन्त्रों से जिन्हें हम समझते हैं हौर हम अपनी भाषा में इसे कहते हैं ‘‘इसराइली रणनीति’’। हमला ऐसा करो कि खुद को भी नुकसान हो और लोग ये समझें कोई क्यों अपने को नुकसान पहुंचायेगा और आरोप आये उनपर जिनको हम गुनहगार साबित करें।
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समय से बीमारी का इलाज नहीं किया गया बल्कि बीमारी को दबा देने की कोशिश की गई। नक्सलवाद बढ़ता गया और कभी पीपुल्स वार ग्रुप के नाम से चलता रहा और कभी माओवाद के नाम से और आज जो आन्दोलन 1960 की दहाई में जन्मा उसने आज विकराल रूप ले लिया क्योंकि जिन अवयवों से इसका जन्म हुआ वह अवयव समाप्त नहीं किये गये बल्कि जुल्म को बढ़ने दिया गया, सरकारें भी जालिमों का साथ देती रहीं और नतीज़ा आज सामने है। अब भी समय है जुल्म को समाप्त करने का, जालिमों का पंजा मरोड़ने का और राजनीतिक दलों को कार्पोरेट का एजेन्ट न बनकर जन-प्रतिनिधि बनकर जन-साधारण के कल्याण के लिए काम करने का। अगर कोई देश का भला चाहता है तो किसी नेता को, मंत्री को या दल को इस तरह की सलाह देना होगा न कि अपने ही देश की जनता का दमन करने की सलाह। भाजपा की देश के गृहमंत्री को दी गई सलाह यह प्रकट करती है कि भाजपा भी देश के जन-साधारण के दमन के लिए तत्पर है, इसमें और कांग्रेस में कोई अन्तर नहीं है इसलिए कि इससे पहले भी महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस का साथ दे चुकी है।
मुझे जानवरों का कोई शौक नहीं है और न ही जानवरों में कोई दिलचस्पी। वे इसलिए कि जानवर पालने के लिए जानवर बनना जरूरी है, चाहे वह थोड़ी ही देर के लिए। यह जरूर है कि जानवरों से पैदा होने वाली चीज़ का इस्तेमाल करता हूं। जानवरों से एक सीख जरूर मिली है कि एक जानवर दूसरे जानवर को कभी कुछ देता नहीं है, शायद इसीलिए मैथिली शरण गुप्त ने लिखा हैः यही पशु प्रवृत्ति है कि आप-आप ही चरे,
आज अगर मैथिलीशरण गुप्त जीवित होते तो हर पल जीवित रहते हुए मरते रहते, वो इसलिए कि मनुष्य ने भी पशुता को चरितार्थ कर लिया है। एक मनुष्य दूसरे मनुष्य को खते हुए नहीं देख पाता अच्छा खाना देखकर चाहता है कि सामने वाले का खाना ऐन केन प्रकारेण उसकी प्लेट में आ जाए। बिना परिश्रम के वह धनवार बन जाए। अपनी सेवा के लिए सेवक भी रखे और सेवा के बदले सेवक को कुछ न देना पड़े तो फिर कहना क्या।
लगता है कि विषय से भटक गया हूं मैं। लिखने बैठा कुत्ते के विषय में और लिख डाला पशु और मनुष्य के विषय में और शायद मैंने ऐसा इसलिए किया कि अपन आदत के अनुसार मैंने कभी कुत्ता भी नहीं पाला। हां, मैं अपने बड़े भाई के साथ जब रहता था तो उन्होंने जरूर एक बार कुतिया पाली थी। कुत्तों के विषय में जानकारी न रखते हुए भी मैंने विषय कुत्ता चुना और इसीलिए इस विषय पर बहुत ज्यादा लिख नहीं पाऊंगा, फिर भी जितना ज्ञान है उसको यहां उड़ेलने की कोशिश में हूं।
मैं गांव में पैदा हुआ पला-बढ़ा, इसलिए गांव की गलियों में घूमने वाले कुत्तों की जानकारी जरूर रखता हूं। मेरे गांव में एक डूंडा कुत्ता रहता था लेकिन था बहुत तेज। उसका उसके क्षेत्र में इतना आतंक था कि बच्चे हाथ में रोटी लेकर बाहर नहीं निकलते थे, बड़े खुले में बैठकर खाना नहीं खा सकते थे, वो इसलिए कि वह झपट कर लोगों से खाना छीन लेता था। ऐसे भी कुत्ते थे जो आदमियों से डरे सहमे रहते, एक बार एक डण्डा पटकने से भाग खड़े होते और अपने से मजबूत कुत्ते को देखकर दुम दबाकर दांत निपोर देते थे। अगर अपने से मजबूत कुत्ता उनकी तरफ झपटा तो झपटने वाले कुत्ते की मंशा भांप कर ही वो लेट जाते। अब देखिए अपना समाज, क्या अपना समाज इन कुत्तों के समाज से भिन्न है। मनुष्य समाज भी अपने से कमजोर को दबाकर रखता है। कोशिश करता है कि उसका हिस्सा भी खुद खा जाए और दूसरा समाज जो उससे डरता है उसी कमजोर और डरपोक कुत्ते की तरह अपने से मजबूत के सामने दांत निपोरता रहता है। उसका जूठन पाने के लिए झूठी तारीफें करता और क्रोध की मुद्रा में आने पर उस मुद्रा को भांपने के बाद चित पड़ जाता है। गांव से निकलकर कस्बे में आया। मैंने अपने बड़े भाई को देखा उन्होंने कुतिया पाल रखी थी और लोगों को बड़े गर्व से बताते थे कि ये कोई मामूली नस्ल की नहीं है और पहली बार उनकी ही जबान से सुना कि वह अलसीशियन नस्ल की है, भेड़िये की नस्ल से मिलती-जुलती। बड़े भाई का शौक देखकर उनके कहते रहने से मुझे भी उस कुतिया का ध्यान रखना पड़ता था। उसके लिए रातिब का इंतजाम करना पड़ता था, दूध और रोटी तो रोज ही खिलाया जाता। जब तक वो कुतिया नहीं थी मेरे भतीजों के लिए घर में दूध खरीदकर आता था, लेकिन कुतिया पालने से अपने को प्रतिष्ठित होने के एहसास से घर में एक गाय भी पाल ली गई। मैं आज भी सोचता हूं कि गाय पालनी थी तो अपने और बच्चों के लिए क्यों नहीं पाली गई और पाली गई भी तो कुतिया के लिए। उस वक्त भी मेरे अन्दर कुतिया से छोटे होने का एहसास जागा था, लेकिन वो एहसास मन्द पड़ जाता था, जब सोचता था कि शायद वो शिकार में कुछ मददगार साबित हो। कभी-कभी मैं उस कुतिया को लेकर नदी की तरफ चला जाता था, जहां झाड़ी में बहुत सारे छोटे-छोटे जानवर रहते थे और मैं उस कुतिया से उम्मीद रखता था कि वह उन छोटे जानवरों को पकड़ लेगी, लेकिन मुहावरा गलत नहीं है, शिकार के वक्त कुतिया ...........................। कुतिया को शिकार की तरफ ललकारने के लिए हमेशा मैं उससे आगे रहा और वो कभी पुचकारने पर भी मुझसे आगे नहीं हो सकी, इस लिए इस मुहावरे को मैंने तजुर्बे के बाद कहा गया मुहावरा समझा।
एक आदत मैंने और देखी कुत्तों में कि अगर आप एक हड्डी फेंकिये तो कोई कुत्ता अपने सामने वाले कुत्ते को उस हड्डी तक नहीं पहुंचने देना चाहता। इसीलिए शायद यह मुहावरा भी कहा गया - कुत्ते के सामने हड्डी डालना। इस मुहावरे का इस्तेमाल समर्थ लोग खूब करते हैं। हड्डी डालकर लड़ाते और तमाशा देखते हैं और जब लोगों की नजर हड्डी पर होती है तब हड्डी डालने वाला अपने लिए मांस के प्रबंध में लग जाता है। मांस खाता है और हड्डी के लिए लड़ाता है।
क्हा जाता है कि कुत्ता एक वफादार जानवर है और अपने मालिक से वफादारी करने में अपनी जान तक की बाजी लगा देता है। समझदार लोग कुत्ते की वफादारी की जानकारी रखने के कारण कुत्ता पालते हैं, उन्हें दूध और मांस खिलाते हैं। यही सब देखकर पं0 सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ के कलम से स्वर फूटे:
यह श्वानों को जो दूध-वस्त्र मिलता है वह उनकी हैसियत बढ़ाने या उनकी भूख ठीक से मिटाने के लिए मानवतावादी दृष्टिकोण से नहीं होता। उन्हें दूध-वस्त्र मिलता है उनकी सेवाओं के बदले। अक्सर बात चली है कि अमुक घर में ऐसे मोटे और तन्दुरूस्त कुत्ते हैं जो किसी को फाटक से अन्दर नहीं जाने देते। अगर कोई हिम्मत करके आना भी चाहे तो उसकी बोटियां नोच डालते हैं और इस प्रकार उनके घर में कुत्ते रहने से वो और उनका घर सुरक्षित रहता है। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसी नस्ल के कुत्ते हैं जो देखने में सुन्दर लगते हैं और उनकी सुन्दरता इतनी अधिक होती है कि कहीं-कहीं उन कुत्तों के मुकाबले उनके बच्चे नहीं आकर्षक लगते। इसी कारण ऐसे लोगों की गोद में उनके बच्चों की जगह ये कुत्ते पाये जाते हैं। इतना सब होते हुए भी कोई व्यक्ति अपने को कुत्ता कहलवाना नहीं पसंद करता। वह चाहे जिस कुत्ते के चरित्र का हो, अगर कोई उसे कुत्ता कह दे तो कुत्ते की तरह उसका मुंह नोंच लेता है।
हम मनुष्य हैं, मनुष्य रहें, मानवता के लिए अपने को समर्पित कर दें, स्वयं में मानवता लायें, कुत्ते के चरित्र से अपने को दूर रखें तो यह मानव समाज, मानव समाज बन जाएगा और इस समाज को हम कुत्ता समाज से अलग कर सकेगें। इसलिए हम अपने लिए जब कुत्ता शब्द उचित नहीं समझते तो आवश्यक है कि कुत्ता चरित्र छोड़कर मानव चरित्र अपनायें। बस इतने मात्र के लिए मैंने आज कुत्ता विषय पर कुछ पंक्तियां लिख डालीं।
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26.11.2008 को हमला हुआ भारत के शहर मुम्बई में कई स्थानों पर। पुलिस द्वारा एक आतंकी अज़मल आमिर कस्साब को जिन्दा गिरफ्तार करने का दावा किया गया। यह जांच करना कि अज़मल आमिर कस्साब कौन है, कहां से और कैसे आया, सम्बन्धित मुकदमे के विवेचक का काम था जो उन्होंने किया। उसकी संलिप्तता पर निर्णय न्यायालय को देना है जिससे मुझे कोई मतलब नहीं, इसलिए कि उसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। इसी मुकदमे में दो और लोगों को अभियुक्त बनाया गया जिनके नाम क्रमशः फहीम अरशद अन्सारी और सबाउद्दीन हैं। सबाउद्दीन को उत्तर प्रदेश एस0टी0एफ0 ने 10.02.2008 को लखनऊ से और फहीम अरशद अन्सारी को 10.02.2008 को रामपुर से गिरफ्तार करने का दावा उत्तर प्रदेश एस0टी0एफ0 द्वारा किया गया, जो गिरफ्तारी के बाद लखनऊ व बरेली जेल में रखे गये और बराबर मुम्बई पर हुए हमले की तारीख तक उन्हीं जेलों में रहे, फिर भी उन्हें मुम्बई हमलों का अभियुक्त बताकर उनके विरूद्ध मुकदमे कायम किये गये और उन मुकदमों का परीक्षण मुम्बई की विशेष न्यायालय में हुआ। परीक्षण पूरा हो चुका है, बहस समाप्त हो चुकी है, निर्णय शेष है लेकिन यह सब होते हुए भी पाकिस्तान ने रट लगा रखी है कि अज़मल आमिर कस्साब और फहीम अन्सारी को उसके सुपुर्द किया जाए। घटना घटित होती है भारत में अभियुक्तों पर अभियोग है भारत की आतंकी घटना में शामिल रहने का, इन अभियुक्तों के खिलाफ पाकिस्तान भूभाग में कोई अपराध कारित करने का आरोप नहीं है और पाकिस्तान में अपराध न कारित होने के कारण इन अभियुक्तों के खिलाफ पाकिस्तान की अदालत में कोई मुकदमा नहीं कायम किया जा सकता, फिर भी हठधर्मी है पाकिस्तान की, कि इन अभियुक्तों को उसके सुपुर्द किया जाए।
मुम्बई की आतंकी घटना में संलिप्तता बतायी जाती है डेविड कोलमैन हेडली की जो इस समय अमेरिका की गिरफ्त में है। यह वही डेविड कोलमैन हेडली है जिसके सम्बन्ध सी0आई0ए0 से बताए गये हैं। इस डेविड कोलमैन हेडली को भारत द्वारा अमेरिका से दबी जुबान में मांगा गया है, कभी अमेरिका ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर उसे भारत को दिया जा सकता है और कभी बिल्कुल इसका उल्टा कहा गया है। अगर डेविड कोलमैन हेडली की संलिप्तता मुम्बई के 26.11.2008 की आतंकवादी घटना में पायी जाती है तो उसके प्रत्यावर्तन के लिए भारत द्वारा प्रयास किया जाना आवश्यक है क्योंकि वह भारत का अपराधी है। अगर पाकिस्तान भारत के अपराधी अज़मल आमिर कस्साब और फहीम अरशद अन्सारी को मांगता है तो उसकी ये हठधर्मिता डेविड कोलमैन हेडली के लिए अमेरिका के प्रति क्यों नहीं दिखाई देती? इसका मतलब साफ है कि पाकिस्तान अमेरिका के सामने घुटने टेक कर रहता है और उसी की शह पर वो भारत के सामने सीना तानकर हठधर्मी करता है। अपराधिक घटना भारत भूभाग पर घटित होती है, संलिप्तता पाकिस्तानी नागरिक और एक समय में सी0आई0ए0 के एजेन्ट रहे व्यक्ति की पायी जाती है, ऐसी स्थिति में विवेचना का अधिकार केवल हमारे देश को है। संदिग्ध व्यक्ति से पूछताछ का अधिकार हमारे देश की विवेचना करने वाली विवेचना एजेन्सी को है और यदि किसी विदेशी राष्ट्र में साक्ष्य पाये जाने की उम्मीद होती है तो उस साक्ष्य को ग्रहण करने का अधिकार भी हमारे देश की विवेचना करने वाली एजेन्सी को हैय लेकिन यहां तो सब कुछ उल्टा हुआ, घटना घटित होती है भारत में, विवेचना करती है अमेरिका की एफ0बी0आई0। प्रक्रिया को ताक पर रखकर घटना की चश्मदीद गवाह बतायी जाने वाली अनीता उदैया को एफ0बी0आई0 उठा ले जाती है अमेरिका और फिर वापस छोड़ जाती है लेकिन हमारे देश की सार्वभौमिकता इतनी बड़ी घटना पर चुप्पी साध लेती है। सम्प्रभुता एक अवयव है, देश का सरकार दूसरा अवयव है उसी का, भूमि और आबादी भी उसी के अवयव हैं लेकिन हमारी सम्प्रभुता को समाप्त करके देश को अपंग किया जाता है फिर भी हमारा एक अवयव जिसको सरकार के नाम से जानते हैं चुप्पी साध लेता है, फिर क्या करे ये भूभाग जिसके पास जु़बान नहीं है और आबादी जिसके हम अंग हैं डर के मारे उसकी जु़बान पर ताला लग जाता है। हम भी पाकिस्तान की तरह निरिह हैं क्योंकि जिस भाषा में पाकिस्तान हमसे बात करता है हम उसकी ही भाषा में उससे बात करते हैं बल्कि पाकिस्तान दुराग्रही होता है जिसको हम चरित्रगत नहीं कर पाते हैं और पाकिस्तान की भांति हम भी अमेरिकी साम्राज्य के सामने झुके रहते हैं, कभी-कभी हल्की सी आवाज़ इन्साफ के लिए बाहर आती है जैसाकि अभी ओबामा के साथ की गई मुलाकात में हमारे प्रधानमंत्री की आवाज बाहर आयी लेकिन फिर भी हम मजबूर हैं साम्राज्यवाद के समक्ष।
वाह रे पाकिस्तान! घटना तुम्हारे नागरिक हमारे घर में घुसकर कारित करें और फिर भी तुम उन्हें अपने घर ले जाने की जिद पर अड़े हुए हो। फहीम अरशद अन्सारी को किस कारण से तुम अपने देश ले जाना चाहते हो यह समझ से परे लगता है क्योंकि वह तुम्हारे देश का नागरिक भी नहीं है, वह नागरिक तो है भारत का। उसके खिलाफ तुम्हारे पास कोई मुकदमा भी नहीं है तो किस आधार पर तुम उसे ले जाना चाहते हो। यह फहीम अरशद अन्सारी तो 10.02.2008 को 00:10 बजे रामपुर में उ0प्र0 एस0टी0एफ0 के हाथों गिरफ्तार होना दिखाया गया है और उसके पास से तमाम चीजों के अलावा मुम्बई के नौ नक्शे लाइनदार कागज पर कलम से बनाये हुए और एक सादे कागज पर पेंसिल से बनाये हुए बरामद किया जाना दिखाया गया है। 10.02.2008 को रामपुर में बरामद किये गये नक्शों के आधार पर मुम्बई की घटना में भी उसे जोड़ दिया गया और कहा गया कि उसने घटना कारित करने के लिए नक्शे उपलब्ध कराये जबकि वह नक्शे मुकदमा अपराध संख्या-210/08 अन्तर्गत धारा 420/467/468/471/121ए थाना कोतवाली रामपुर में रखा गया और उसी नक्शे के आधार पर बाद में मुम्बई में भी फहीम अरशद अन्सारी और सबाउद्दीन को अभियुक्त बनाया गया और वहां उनके विरूद्ध परीक्षण हुआ। उस नक्शे को मुम्बई की घटना से जोड़ने के लिए फहीम अन्सारी को तथाकथित रूप से जानने वाले एक गवाह नारूद्दीन महबूब शेख़ को अभियोग पक्ष द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसने न्यायालय में अपने बयान में कहा है कि जनवरी, 2008 में वह काठमाण्डू घूमने गया था जहां अचानक उसकी मुलाकात फहीम अरशद अन्सारी से हुई जिसे वह बचपन से जानता था। मुलाकात पर फहीम अरशद अन्सारी उसे अपने कमरे पर ले गया और कमरे में उसने सबाउद्दीन से परिचित कराया जिसने फहीम अरशद अन्सारी से पूछा कि क्या फहीम ने लकवी द्वारा सौंपा काम पूरा कर लिया, जिस पर फहीम ने अपने बैग से कागज निकालकर सबाउद्दीन को सौंपा और सबाउद्दीन को कागज देते वक्त कागज नीचे गिर गया जिसको गवाह ने नक्शे बताये हैं। नक्शों को देखकर महबूब शेख़ ने फहीम से पूछा भी कि क्या उसने नक्शे बनाने का कारोबार शुरू कर दिया है जिसका जवाब फहीम ने नहीं दिया लेकिन सबाउद्दीन ने कहा कि उसके कुछ दोस्त पाकिस्तान से आने वाले हैं दोस्तों को जरूरत है, जिसपर महबूब शेख़ ने कहा कि नक्शे तो आसानी से प्राप्य हैं फिर उसे नक्शे तैयार करने की क्या जरूरत पड़ी, जिस पर सबाउद्दीन ने बताया कि बाजार में मिलने वाले नक्शों में सभी सूचना सही नहीं होती, इसलिए सही सूचना प्राप्त करने के उद्देश्य से यह नक्शे तैयार कराये गये हैं। इस प्रकार वह नक्शे जिनके आधार पर मुम्बई पर आतंकवादी हमला होना बताया जाता है काठमाण्डू में फहीम अरशद अन्सारी द्वारा सबाउद्दीन को जनवरी, 2008 में सौंप देने के बाद फिर उसी के पास से 10.02.2008 को कैसे बरामद हुए और फिर बरामद होने के बाद एस0टी0एफ0 के पास और एस0टी0एफ0 द्वारा न्यायालय में दाखिल कर देने के बाद न्यायालय की कस्टडी में रहते हुए मुम्बई आतंकवादी घटना में कैसे प्रयोग में लाये गये, यह सवाल जवाब तलब हैं और इनका जवाब न होते हुए भी पाकिस्तान हठधर्मी कर रहा है, फहीम अरशद अन्सारी को अपनी हिरासत में लेने की, जो जायज़ नहीं है और किसी भी आधार पर भारत के दोषियों को ले जाने का अधिकार पाकिस्तान को नहीं प्राप्त है।
जन सूचना अधिकार के अन्तर्गत प्राप्त सूचना में जहां यह कहा गया है कि राज्य सभा में 100 सदस्य करोड़पति हैं वहीं यह भी कहा गया है कि राहुल बजाज जिनकी सम्पत्ति 300 करोड़ रूपये की है वह महाराष्ट्र से आजाद उम्मीदवार की हैसियत से जीतकर राज्य सभा में बैठे हैं। जनता दल सेक्यूलर के राज्य सभा सदस्य एम0ए0एम0 रामास्वामी के पास 278 करोड़ रूपये, कांग्रेस की टी0 सुब्रह्मी रेड्डी के पास 272 करोड़ रूपये सम्पत्ति के स्वामी हैं। सबसे अधिक करोड़पति कांग्रेस पार्टी के जिनकी संख्या 33, फिर बीजेपी की जिनकी संख्या 21 और समाजवादी पार्टी के 7 सदस्य हैं। समाजवादी पार्टी की जया बच्चन के पास 215 करोड़ रूपये और अमर सिंह के पास 79 करोड़ रूपये की सम्पत्ति है। लेकिन भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के डी0 राजा और भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी) के सुमन पाठक के पास कोई सम्पत्ति नहीं है। असल में यही दोनों जनता के सच्चे प्रतिनिधि हैं और जनता की आवाज मुखर करने वाले प्रबल प्रहरी हैं। कबीर के सच्चे अनुयायी हैं और उनके बताये गये रास्ते ‘‘कबीरा खड़ा बाजार में लिए लुखाटा हाथ, जो घर फूंके आपनो वे आए मेरे साथ’’ पर चलने वाले सच्चे लोग हैं और मैं फिर कहूंगा कि यही गुलिस्तां को गुलज़ार करने वाले लोग हैं, जैसा कि इकबाल ने कहा है,
‘‘मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कुछ मर्तबा चाहे,
कहां बहक गया मैं भी बात कर रहा था राज्य सभा में 100 करोड़पतियों कि और बात करने लगा कबीर और इकबाल की। राज्य सभा में अधिकांश सदस्य विधान सभाओं से चुनकर आते हैं और जन प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व करते हैं यानी जन प्रतिनिधियों के प्रतिनिधि होते हैं। मेरा मानना है कि जन प्रतिनिधि के नाम पर हर पार्टी में पार्टी के वफादार लोग या यूं कहिए कि पार्टी के साथ वफादारी के नाम पर राज्य सभा में पहुंचाये जाने वाले लोगों के वफादार लोग होते हैं क्योंकि पार्टियों को भी पैसा इन्हीं लोगों से पहुंचता है। यह बात रही धन-बल की लेकिन धन-बल को समर्थन देने के लिए छल-बल और बाहुबल भी जरूरी है। खबर यह भी बताती है कि राज्य सभा में आपराधिक चरित्र के कांग्रेस के 6 तथा भाजपा और बसपा के 4-4 सदस्य राज्य सभा में हैं। यही कारण है कि यह प्रतिनिधि सदन में पहुंचकर जन कल्याणकारी काम न करके जन विरोधी कामों को अपना समर्थन देते हैं। इस खबर पर यह मेरी अपनी टिप्पणी नहीं बल्कि मेरी भावनाओं का प्रतिबिम्ब है और यह प्रतिबिम्ब मैंने केवल इसलिए प्रस्तुत किया है कि इस पर ध्यान दीजिए कहीं यह प्रतिबिम्ब आपकी भावनाओं को तों नहीं है।
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अपर पुलिस अधीक्षक स्पेशल टास्क फोर्स उ0प्र0 श्री अशोक कुमार राघव ने दि0 10.2.2008 को थाना सिविल लाइन, रामपुर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराया, जिसके आधार पर मु0अ0सं0-209/08 अन्तर्गत धारा 25 आयुध अधिनियम तथा मु0अ0सं0-210/08 अन्तर्गत धारा 420/467/468/471/121ए भा0द0सं0 समय 3:30 पर पंजीकृत हुआ। यह दोनों मुकदमें फहीम उर्फ अरशद उर्फ हसन अम्मान के खिलाफ दर्ज किये गये। मुखबिर की सूचना पर एस0टी0एफ0 की टीम का करीब 22:30 बजे जंग बहादुर से पूछताछ किया और उससे प्राप्त सूचना के आधार पर सभी टीमें जंग बहादुर को लेकर बस स्टेशन रामपुर पहुंची और गाड़ियों को छोड़कर छिप गई। बस स्टैण्ड पर मौजूद जनता के व्यक्तियों से नकसद बताकर गवाही को कहा तो सभी लोग दुश्मनी होने के डर से अपना नाम बताये बिना चले गये। सब पुलिस कर्मियों ने आपस में एक-दूसरे की जामा तलाशी ले-देकर इतमिनान किया कि किसी के पास कोई नाजायज़ वस्तु नहीं थी कि तभी जंग बहादुर ने मुख्य मार्ग से बिलासपुर को जाने वाले रास्ते के मोड़ पर बायीं पटरी पर लगी पान व चाय की दुकान के पास खड़े दो व्यक्तियों की तरफ इशारा करके बताया कि मैरून कलर का बैग लिए हुए व्यक्ति शरीफ उर्फ सुहैल था और दूसरा उसका साथी था। इस पर अपर पुलिस अधीक्षक द्वारा हमराही फोर्स की मदद से एकदम घेर कर आवश्यक बल प्रयोग करके दि0 9.2.2008 व 10.2.2008 रात्रि समय 00:10 बजे पकड़ लिया। नाम-पता पूछा जिस पर एक ने अपना नाम शरीफ तथा उर्फ में कई एक नाम और दूसरे ने अपना नाम फहीम उर्फ अरशद उर्फ हसन अम्मान उर्फ साकिब उर्फ अबू जर्रार उर्फ साहिल पास्कर उर्फ समीर शेख पुत्र मो0 युसुफ अंसारी निवासी 4 नं0 303 रूम नं0 2409, मोतीलाल नगर नं0 2 एम0जी0 रोड, गोरेगांव (वेस्ट), मुम्बई बताया। जामा तलाशी में उसके दाहिने सुड्डे में खोंसा हुआ एक अदद स्टार पिस्टल 30 बोर जिसकी स्लाइड पर ततारा आम्र्स फैक्ट्री, पेशावर सी0ए0एल0-30 माउज़र अंकित था, बट पर 651 नं0 पड़ा था, दोनों तरफ धारीदार स्टार की चाप लगी थी, पिस्टल में एक मैगजीन जिसमें 6 अदद जिन्दा कारतूस भरी थीं, जिन्हें मैगजीन से निकाला गया, अतः पहनी जीन्स की बायीं जेब से 15 कारतूस जिन्दा बरामद हुए। पैन्ट की पिछली बायीं जेब से एक अदद पासपोर्ट, एक अदद कार्ड, 470 रूपये, जीन्स की पिछली दाहिनी जेब से नई दिल्ली से मुम्बई का 12.2.2008 का रेलवे टिकट दि0 10.2.2008 को अवध एक्सप्रेस का बान्द्रा टर्मिनल से मुजफ्फरपुर जंक्शन का टिकट तथा 9 अदद लाइनदार कागज में हाथ से पेन द्वारा बने हुए नक्शे, दो अदद कागजों में कम्प्यूटर के विषय में लिखी जानकारी और एक अदद सफेद कागज जिस पर पेन्सिल से नक्शा बना था, बरामद हुआ।
प्रथम सूचना रिपोर्ट में कहा गया है कि शरीफ ने अपर पुलिस अधीक्षक के पूछने पर यह भी बताया था कि वह बाबा के साथ फिदायीन का इंतजार करते रहे, बचा हुआ कारतूस मैगजीन व हैण्ड ग्रेनेड तथा ए0के0-47 बाबा लेकर चला गया था, वह और फिदायीन अलग-अलग रास्तों से अपने-अपने ठिकानों पर चले गये। उन असलहों को लेकर मुम्बई में फहीम उर्फ अरशद के बताये हुए स्थान पर फिदायीन घटना करनी थी। मुम्बई में घटना करने के लिए वह लोग उन असलहों को लेकर अलग-अलग रास्तों से मुम्बई जाने को थे। शरीफ और फहीम दिल्ली से मुम्बई जाते, सबा और अमर सिंह तथा आरिफ नौचंदी एक्सप्रेस से लखनऊ चले गये थे और उनका असलहा उनके साथ में था। फहीम से की गई पूछताछ में प्रथम सूचना रिपोर्ट में लिखा है कि वह सऊदी अरब काम करता था और वहां से पाकिस्तान टे्निंग करने गया था। बरामदशुदा नक्शों को उसने रायकी करके मुम्बई में बनाया था। उसे मुम्बई के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठित जन तथा सरकारी दफ्तरों को रायकी करने व नक्शा बनाने के लिए भेजा गया था। मुम्बई में साहिल पावस्कर के नाम से एक कमरा किराये पर लेकर वहां तीन फिदायीन व उनके एक साथी को पहुंचाकर रूकना था, जिनको लेने के लिए वह रामपुर गया था। उसके पास से बरामद कागजात नक्शा आदि एक सफेद कपड़े में रखकर सील-मुहर किया जाना भी प्रथम सूचना रिपोर्ट में दर्ज है। लेकिन इस अभियुक्त को सी0आर0पी0एफ0 कैम्प, रामपुर के हमले में अभियुक्त नहीं बनाया गया।
फहीम अंसारी के दोनों मुकदमों में आरोप-पत्र प्रस्तुत हुआ, अंततः मुख्य न्यायिक मजिस्टे्ट रामपुर ने मुकदमें को सत्र सुपुर्द कर दिया और फहीम अंसारी के विरूद्ध प्रथम सत्र न्यायाधीश रामपुर ने आरोप रचित किये लेकिन साक्ष्य नहीं प्रस्तुत किया जा सका।
फहीम अरशद अंसारी के मुकदमें का विचारण लम्बित था और वह सेन्ट्रल जेल, बरेली में रखा गया था जहां से भारी सुरक्षा के बीच उसे रामपुर न्यायालय में लाया जाता था।
दि0 26.11.08 की रात जो मुम्बई में भयानक तबाही लेकर आई जो कभी भूलने लायक नहीं है, जगह-जगह पर आतंकवादी हमले हुए जिसमें बहुत सारे लोगों की निर्मम हत्या की गई। निर्दोष लोग मारे गये, सम्पत्ति को क्षति पहुंची और देश के जांबाज़ सपूतों हेमन्त करकरे, अशोक काम्टे और विजय सावस्कर को शहीद कर दिया। मुम्बई शहर के अनेक हिस्सों में आतंकवाद का तांडव और तांडव करने वाले केवल दस आतंकवादी बताये गये। दस में नौ मार डाले गये जिनको मुम्बई के मुसलमानों ने अपने कब्रिस्तान में दफनाने की जगह नहीं दी, उनके शवों को जे0जे0 हास्पिटल के वातानुकूलित मुर्दाघर में रखा गया, लेकिन देश यह जानता रहा कि नौ लाशें मुर्दाघर में हैं लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने गुपचुप तरीके से उन शवों को ऐसी जगहों पर दफनाया जिनका पता किसी को न लग सका, यहां तक कि दफनाये जाने की जानकारी भी महाराष्ट्र विधान परिषद् में पूछे गये सवाल के जवाब से मिली।
मैं इस सवाल को नहीं उठा रहा हूं कि हेमन्त करकरे जैसे ईमानदार और जांबाज़ देशभक्त कैसे मारे गये, उनकी जैकेट कहां गई, उनके बार-बार मदद मांगे जाने पर भी समय से मदद क्यों नहीं पहुंचायी गई, केवल दस आतंकियों ने मुम्बई के अनेक हिस्सों में कैसे तबाही मचायी, सबद हाउस में क्या हो रहा था, इसराइली नागरिक निर्वाद रूप से महाराष्ट्र तथा देश के दूसरे हिस्सों में कैसे विचरण करते रहते हैं, उनके पास से प्रतिबंधित सेटेलाइट फोन बरामद होने पर उनके खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की जाती, उनके लैपटाप और कम्प्यूटर से प्रसारित संदेशों की छानबीन क्यों नहीं की जाती, सी0आई0ए0 मोसाब, आई0एस0आई0 और एफ0बी0आई0 के रिश्तों को क्यों नहीं उजागर किया जाता, एफ0बी0आई0 बिना इज़ाज़त अनीता उदैय्या को किस तरह अमेरिका उठा ले जाती है और फिर भारत में लाकर छोड़ जाती है, कोल्ड मैन हेडली का सी0आई0ए0 और एफ0बी0आई0 से क्या रिश्ता है, उसे भारत की जांच एजेन्सी के हवाले क्यों नहीं किया जाता, महाराष्ट्र और गोवा के सबद हाउस में क्या गतिविधियां चलती हैं, यह सारे के सारे सवाल अभी नहीं तफ्शील से फिर कभी। आज तो मैं सिर्फ और सिर्फ फहीम अंसारी तक अपने को सीमित रखता हूं।
मुम्बई में हुई घटना पर मु0अ0सं0-182/08 कायम हुआ और डी0सी0बी0सी0आई0डी0, यूनिट-3 मुम्बई द्वारा उसकी विवेचना शुरू की गई। विवेचना के दौरान डी0सी0बी0सी0आई0डी0 के लोग रामपुर से फहीम अंसारी को मुम्बई के केस के संबंध में दिसम्बर, 2008 में पूछताछ करने के लिए ले गये और मुम्बई ले जाने के बाद यह साबित करने की कोशिश हुई कि फहीम अंसारी ने मुम्ब ई में रहकर नक्शा बनाया और रायकी की और इस काम के लिए उसने एक महीने के लिए मकान किराये पर लिया लेकिन वह महीना कब से कब तक का था, यह नहीं बताया गया और न ही यह बताया गया है कि कमरा किराये पर कहां लिया गया था। फिर भी पुलिस कहती है कि फहीम अंसारी ने मुम्बई में रहकर रायकी किया और नक्शे बनाये।
इसी तरह पुलिस का एक गवाह नारूद्दीन महबूब शेख सामने लाया गया जिसने बताया कि वह जनवरी, 2008 में काठमाण्डू गया था जहां उसे फहीम अंसारी मिला और अपने कमरे पर ले गया, वहां उसके कमरे पर एक और आदमी पहुंचा जिसने कुछ देर रूकने के बाद पूछा कि क्या फहीम अंसारी ने लखवी द्वारा सौंपा गया काम पूरा कर दिया है जिस पर फहीम अंसारी ने अपने बैग से कुछ कागजात निकालकर उस आदमी को दिया, जो देते वक्त नीचे गिर गया, जिसे नारूद्दीन ने देखा कि वह नक्शा था और उससे कहा कि क्या उसने नक्शा बनाने का धन्धा शुरू कर दिया था, जिसका फहीम अंसारी ने कोई जवाब नहीं दिया। फिर बाद में कहा कि उसके कुछ दोस्त पाकिस्तान से मुम्बई घूमने जा रहे हैं जिनको नक्शे की जरूरत है। बाद में दूसरे दिन नारूद्दीन को फहीम अंसारी के साथ उसके होटल के कमरे में मिलने वाला व्यक्ति मिला जिसकी शिनाख्त सबाउद्दीन के रूप में की गई है जिसने नारूद्दीन के पूछने पर बताया कि फहीम अंसारी मुम्बई जा चुका था। रामपुर से फहीम अंसारी के साथ उसके पास से बरामद कागजात भी मुम्बई के न्यायालय में तलब किये गये थे। जिनमें वो नक्शे भी हैं जिन्हें नारूद्दीन ने फहीम के होटल के कमरे में फहीम द्वारा सबाउद्दीन को देते हुए देखा था। सबाउद्दीन 10.2.2008 को लखनऊ में गिरफ्तार किया गया लेकिन नक्शे उसके पास से नहीं बरामद हुए।
नक्शे बरामद हुए फहीम अंसारी के पास से रामपुर में, उसकी गिरफ्तारी दि0 10.2.2008 को, जिसे लेकर वह मुम्बई जाने को था लेकिन मुम्बई न जा सका और रामपुर में गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया।
मैंने तथ्य आपके सामने रख दिया, जनवरी, 2008 में जिसकी-तारीख गवाह का नहीं पता, फहीम अंसारी ने अपने हाथ का बनाया हुआ नक्शा सबाउद्दीन को दिया फिर भी वो नक्शे सबाउद्दीन के पास से बरामद न होकर फहीम अंसारी से बरामद होते हैं और फहीम अंसारी के बरेली जेल में निरूद्ध रहते हुए उनका इत्तेमाल मुम्बई में बताया जाता है। दोषी कौन? एक प्रश्न बुद्धिमत्ता!
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लो क सं घ र्ष !: कारागार से कविता : मेरा प्यारा हिन्दुस्तान
0 comments Posted by Shuaibvaani at 3:19 AMमेरा प्यारा हिन्दुस्तान, प्यारा-प्यारा हिन्दुस्तान
हिन्दू-मुस्लिम आंखें इसकी, आर्या का दिल
गंगा-यमुना बहते-बहते, जहां पर जाते मिल
तरह-तरह के बूटे-पौधे, भांति-भांति इंसान
मेरा प्यारा हिन्दुस्तान, प्यारा-प्यारा हिन्दुस्तान।
काशी जैसी सुबह मिले है, अवध के जैसी शाम
हर कोई को लुत्फ मिले है, खास हो चाहे आम
हरियाणा हो या दिल्ली, यू0पी0 चाहे राजस्थान
मेरा प्यारा हिन्दुस्तान, प्यारा-प्यारा हिन्दुस्तान।
इल्म व हुनर का गह्वारा है, प्यार सी प्यारी धरती है
वलियों ऋषियों मुनियों की, बसती यहां पर बस्ती है
मोड़-मोड़ पर भजन-कीर्तन, गली-गली अज़-आन
मेरा प्यारा हिन्दुस्तान, प्यारा-प्यारा हिन्दुस्तान।
कुछ दिन पहले नम थी आंखें, रंज व अलम था छाया
चारों तरफ कोहराम मचा था, दहशत का था साया
मक्कारी से काबिज था गोरा, मलैच्छ शैतान
मेरा प्यारा हिन्दुस्तान, प्यारा-प्यारा हिन्दुस्तान।
टीपू ने फुंकार भरी, तो अहल-ए-वतन ललकारे
शेख अज़ीज भी फतवे से गोरों से धिक्कारे
गरम किया था दिलवालों ने शामली मैदान
मेरा प्यारा हिन्दुस्तान, प्यारा-प्यारा हिन्दुस्तान।
चन्द्रशेखर, बिस्मिल, मदनी और बढ़े आजाद
गली-गली ललकारा उनको, जनता से की फरियाद
मेरठ, दिल्ली, कानपुर, झांसी, मच उठी घमशान
मेरा प्यारा हिन्दुस्तान, प्यारा-प्यारा हिन्दुस्तान।
सबके हक का रखवाला है, सबके दिल का प्यारा
कल्चर इसका मशरिक वाला, बना है चांद-सितारा
अवामी इसका तर्ज-ए-हुकुमत, लोकतंत्र है शान
मेरा प्यारा हिन्दुस्तान, प्यारा-प्यारा हिन्दुस्तान।
- मो0 तारिक कासमी
( मेरे मोवाक्किल मो0 तारिक कासमी ने कारागार से कविता लिख कर भेजी है जिसको प्रकाशित किया जा रहा है )
loksangharsha.blogspot.com
